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प्रेस क्लब ऑफ भारत में शिक्षक सम्मान समारोह, शिक्षा और पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर हुआ सार्थक मंथन

प्रेस क्लब ऑफ भारत में शिक्षक सम्मान समारोह, शिक्षा और पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर हुआ सार्थक मंथन

ग्रेटर नोएडा। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब ऑफ भारत के कार्यालय में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने किया। इस दौरान गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की एचओडी बंदना पांडे, शारदा विश्वविद्यालय की डीन रितु सूद, गलगोटिया विश्वविद्यालय की नेहा जिंदल और आईआईएमटी कॉलेज के एचओडी राम शंकर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, पत्रकारिता और एआई के दौर में बदलती सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार साझा किए गए।

इस दौरान बंदना पांडे ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 5 सितंबर महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक और गुरु दोनों का विशेष महत्व है। “शिक्षक ज्ञान देता है, जबकि गुरु जीवन का बोध कराता है और सही दिशा दिखाता है। विद्यार्थियों के जीवन निर्माण में दोनों की भूमिका अनमोल है।” उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने को अपने लिए गौरव का विषय बताया, जहां डॉ. राधाकृष्णन कुलपति रहे थे।

रितु सूद ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सोच, व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने वाला मार्गदर्शक है। “आज के दौर में बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार, संवेदनशीलता और सही निर्णय लेने की क्षमता देना शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

नेहा जिंदल ने एआई के बढ़ते प्रभाव पर कहा कि आज बच्चों के पास जानकारी की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही दिशा की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। “एआई सूचना दे सकता है, लेकिन सही और गलत में अंतर समझाकर जीवन की सही दिशा दिखाने का काम शिक्षक ही कर सकता है। इसलिए आने वाले समय में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।”

राम शंकर ने कहा कि एआई और जेन-Z के दौर में सूचना के साथ शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक चेतना का महत्व बढ़ गया है। “शिक्षक समाज को संस्कार और ज्ञान देते हैं, जबकि पत्रकार समाज को सच से रूबरू कराते हैं। दोनों की जिम्मेदारी एक जागरूक और मजबूत समाज के निर्माण से जुड़ी है।”

इस अवसर पर प्रेस क्लब ऑफ भारत के अध्यक्ष नरेंद्र भाटी ने कहा कि पत्रकार समाज की आवाज बनकर दूसरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ता है, लेकिन संकट के समय उसे अकेला नहीं पड़ना चाहिए। “पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी कलम है, लेकिन उस कलम को निर्भीक बनाए रखने के लिए संगठन का साथ जरूरी है। प्रेस क्लब ऑफ भारत पत्रकारों के लिए सहयोग, सम्मान और सुरक्षा का मजबूत मंच बनेगा।” उन्होंने गौतम बुद्ध नगर के पत्रकारों को एकजुट कर निष्पक्ष, निडर और स्वतंत्र पत्रकारिता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

वहीं महासचिव नितिन शर्मा ने कहा कि “पत्रकारिता को बचाने और उसकी विश्वसनीयता को संरक्षित करने के लिए पत्रकारों का एकजुट होना समय की आवश्यकता है। वही कोषाध्यक्ष कैलाश चंद ने कहा कि प्रेस क्लब ऑफ भारत पत्रकारों के हितों और अधिकारों की आवाज को मजबूत करने के लिए निरंतर काम करेगा।” उन्होंने सभी पत्रकारों से संगठन से जुड़कर एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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