*ईपीसीएच का बड़ा विजन: भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर नई ऊंचाई देने की तैयारी*

08 अप्रैल 2026, मुरादाबाद: हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को आगे बढ़ाने और उसे आधुनिक बनाने के लिए एक मजबूत और दूरदर्शी प्लान पेश किया । इसका मकसद साफ है भारत को डिजाइन, क्वालिटी, इनोवेशन और दीर्घकालिक निर्यात के मामले में दुनिया का लीडर बनाना । इस पूरे रोडमैप में खास तौर पर मार्केट तक आसान पहुंच, उत्पादन को अपग्रेड करना, क्वालिटी स्टैंडर्ड मजबूत करना और कारीगरों और निर्यातकों को सीधे इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ना शामिल है ।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की अगुवाई ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने की । उनके साथ ईपीसीएच के मेंबर सीओए और कन्वीनर- सेंट्रल रीजन, श्री अवधेश अग्रवाल, ईपीसीएच के मेंबर सीओए श्री सलमान आजम, श्री रोहित ढल, श्री नावेद उर रहमान और सुश्री राशिम दुग्गल मौजूद रहे । सेंट्रल रीजन के बड़े एक्सपोर्टर्स जैसे श्री नजमुल इस्लाम, श्री जे.पी. सिंह, श्री पुनीत आर्य, श्री कुनाल दवे, श्री अंकित सिंह, श्री विवेक अग्रवाल, श्री सुरेश गुप्ता, श्री संजय गुप्ता, श्री गगन दुग्गल, श्री अंकित अग्रवाल, श्री नरेन्द्र चौधरी, श्री राहुल ढल्ल, श्री विशाल खन्ना, श्री सुमित टंडन, श्री शैलेश खन्ना, श्री रोहन ओहरी, श्री तनुज टंडन और श्री उज्ज्वल भी कार्यक्रम में शामिल हुए, साथ ही मीडिया के लोग भी मौजूद रहे ।
रणनीति को समझाते हुए डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, “ईपीसीएच का फोकस भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को दुनिया का सबसे पसंदीदा सोर्सिंग डेस्टिनेशन बनाना है । हम पारंपरिक कारीगरी की ताकत को आधुनिक टेक्नोलॉजी, बेहतर सिस्टम, क्वालिटी एश्योरेंस और मजबूत मार्केट एक्सेस के साथ जोड़ रहे हैं । हमारा लक्ष्य ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जिससे एक्सपोर्ट बढ़े, भारत की पहचान मजबूत हो और कारीगरों से लेकर एक्सपोर्टर्स तक सभी को टिकाऊ और समावेशी विकास मिले ।”
उन्होंने आगे कहा, “इस विज़न के तहत, हम देश के बड़े हस्तशिल्प क्लस्टर्स में कई बड़े कदम उठा रहे हैं । मुरादाबाद में पहला कैश एंड कैरी सेंटर शुरू होने के बाद अब ऐसे और सेंटर खोलने की योजना है । इसके साथ ही हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने के लिए प्रस्तावित हैंडीक्राफ्ट टेक्नोलॉजी मिशन, मुरादाबाद में एक 3डी स्टूडियो का डेवलपमेंट, जयपुर में टेस्टिंग फैसिलिटी का अपग्रेडेशन, जोधपुर में एक नई टेस्टिंग लैब, अमेरिका और यूरोप में वेयरहाउसिंग और ड्रॉप-शिपिंग मॉडल तैयार करना और आईएचजीएफ दिल्ली मेला ऑटम 2026 (13–17 अक्टूबर, ग्रेटर नोएडा) के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ाव बढ़ाना जैसे कदम शामिल हैं ।”
ईपीसीएच के मेंबर सीओए और कन्वीनर- सेंट्रल रीजन, श्री अवधेश अग्रवाल ने कहा, “ये सभी पहल क्लस्टर आधारित विकास के लिए बेहद अहम हैं । इससे स्थानीय उत्पादन सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों, जैसे डिजाइन, क्वालिटी, स्पीड और कंप्लायंस से जुड़ पाएगी । ईपीसीएच सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि एक्सपोर्टर क्लिनिक, सेमिनार, वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कौशल विकास पर भी जोर दे रहा है । इन कार्यक्रमों में एक्सपोर्ट प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स, डिजाइन इनोवेशन और नए ट्रेंड्स पर फोकस रहेगा ।”
ईपीसीएच के मेंबर सीओए श्री सलमान आजम ने कहा, “इन पहलों से एक्सपोर्टर्स को इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच आसान होगी. मुरादाबाद जैसे बड़े एक्सपोर्ट हब को इसका सीधा फायदा मिलेगा । टेक्नोलॉजी अपग्रेड और थ्रीडी स्टूडियो से एक्सपोर्टर्स अपने प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ट्रेंड्स के मुताबिक बेहतर तरीके से पेश कर पाएंगे ।”
ईपीसीएच के मेंबर सीओए श्री रोहित ढल ने कहा, “नए टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से क्वालिटी स्टैंडर्ड और मजबूत होंगे और विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा ।” वहीं ईपीसीएच के मेंबर सीओए श्री नावेद उर रहमान ने कहा, “वेयरहाउसिंग और ड्रॉप-शिपिंग मॉडल इस सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित होंगे । इससे डिलीवरी तेज होगी और विदेशी ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा में भी बढ़त मिलेगी ।”
ईपीसीएच के मेंबर सीओए सुश्री राशिम दुग्गल ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट और जागरूकता कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं, खासकर एमएसएमई के लिए, ताकि वे बदलते ग्लोबल मार्केट के साथ कदम मिला सकें ।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने कहा, “हमारी रणनीति सिर्फ कागज तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे लागू करने पर भी पूरा फोकस है । टेस्टिंग लैब, ट्रेनिंग, डिजिटल टूल्स और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के जरिए हम निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मौके देना चाहते हैं, ताकि वे खरीदारों की बदलती जरूरतों को पूरा कर सकें ।”
उन्होंने यह भी बताया कि, “लंबे समय की योजना के तहत अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में वेयरहाउसिंग और ड्रॉप-शिपिंग नेटवर्क तैयार किया जाएगा । इससे डिलीवरी तेज होगी, लागत कम होगी और ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनेगी. साथ ही दुनिया के प्रमुख शहरों में फ्लैगशिप और पार्टनर रिटेल स्टोर्स खोलने की भी योजना है, ताकि भारतीय हस्तशिल्प् की पहचान और मौजूदगी और मजबूत हो ।”
श्री राजेश रावत ने बताया कि हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश से हस्तशिल्पों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है. यह लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को दुनिया भर में पहचान दिलाने का काम करती है, जो होम डेकोर, लाइफस्टाइल, फर्नीचर और फैशन ज्वेलरी जैसे प्रोडक्ट्स बनाते हैं । वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन डॉलर) रहा । उत्तर प्रदेश से 7,477.55 करोड़ रुपये (884.13 मिलियन डॉलर) का निर्यात हुआ, जिसमें अकेले मुरादाबाद का योगदान 3,966.84 करोड़ रुपये (469.03 मिलियन डॉलर) का रहा ।
————————————————————————————————————————–विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें
श्री राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच
+91-9810423612

