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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी प्लीज़’ की भावनात्मक स्क्रीनिंग, दर्शकों ने सराहा संवेदनशील संदेश

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी प्लीज़’ की भावनात्मक स्क्रीनिंग, दर्शकों ने सराहा संवेदनशील संदेश

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में प्रसिद्ध पटकथा लेखिका एवं फिल्म निर्देशक अनु सिंह द्वारा निर्देशित शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी प्लीज़’ की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रतीक फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी प्लीज़’ एक ऐसे परिवार की संवेदनशील और भावनात्मक कहानी को प्रस्तुत करती है, जिसमें परिवार का एक सदस्य डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होता है। फिल्म ने पारिवारिक संबंधों, अपनत्व, स्वीकार्यता और सामाजिक संवेदनशीलता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्य और सशक्त कथा ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया, जिसे सभागार में उपस्थित दर्शकों से भरपूर सराहना मिली।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री रविन्द्र इंद्राज सिंह के प्रतिनिधि डॉ. दुर्गेश, माननीय समाज कल्याण मंत्री, दिल्ली सरकार के निजी सचिव के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सम्मानित अतिथियों में फ़िल्म की निर्देशक अनु सिंह, फ़िल्म कलाकार प्रीति अग्रवाल तथा प्रतीक फाउंडेशन से मिस जागृति शामिल रहीं।”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा,
“‘सेल्फी प्लीज़’ जैसी फिल्में समाज को आईना दिखाने का कार्य करती हैं। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करना आज की आवश्यकता है। कला और सिनेमा सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम हैं और यह फिल्म उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।”
उन्होंने इस तरह की रचनात्मक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों को शैक्षणिक परिसरों में प्रदर्शित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

फिल्म की स्क्रीनिंग के उपरांत फिल्म में उठाए गए मुद्दों पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। जिसमे प्रो. राजीव वार्ष्णेय , मिस अनु सिंह , प्रोo माधव गोविंद और मिस प्रीति अगरवाल ने इस विषय पर आपने विचार प्रकट किए। जिसका संचालन डॉ राहुल कपूर के द्वारा किया गया ।

पैनल डिस्कशन मे अपने विचार रखते हुये प्रोo राजीव वार्ष्णेय ने विशेष बच्चे के पालन-पोषण से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि एक विशेष बच्चे का अभिभावक होना उन्हें मानसिक रूप से अधिक सशक्त बनाता है। उन्होंने ‘सामान्यता’ (normality) की अवधारणा पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि यह एक अमूर्त विचार है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति स्वयं को पूर्णतः सामान्य होने का दावा नहीं कर सकता।”

सुश्री अनु सिंह, निदेशक, सेल्फी प्लीज़ ने विशेष बच्चों के लिए समावेशी और संवेदनशील स्थानों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार समाज को सोच और संरचना दोनों स्तरों पर अधिक समावेशी बनने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सेल्फी प्लीज़ को एक फीचर फ़िल्म में परिवर्तित करने की उनकी योजना है, जिससे इस विषय पर व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके।

चर्चा मे प्रो. माधो गोविंद, डीन, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़ ने प्राथमिक देखभालकर्ताओं पर पड़ने वाले देखभाल-भार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देखभाल केवल शारीरिक नहीं, बल्कि गहरे भावनात्मक और समाजशास्त्रीय पहलुओं से भी जुड़ी होती है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

वहीं सुश्री प्रीति अग्रवाल मेहता, अभिनेत्री एवं शिक्षाविद् ने विशेष बच्चों के लिए समावेशी वातावरण बनाने में नागरिक समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब अकादमिक जगत और सिविल सोसाइटी मिलकर प्रयास करती हैं, तभी वास्तविक और स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव हो पाता है।

 

इस अवसर पर विश्वविद्यालय उप कुलसचिव सहित विभिन्न संकाय के डीन, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

फिल्म की निर्देशक अनु सिंह ने दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस फिल्म का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना है, ताकि विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को समझा और स्वीकार किया जा सके।

कार्यक्रम का समापन तालियों की गूंज और भावनात्मक माहौल के साथ हुआ, जिसने यह सिद्ध किया कि ‘सेल्फी प्लीज़’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि सामाजिक संवेदना का सशक्त संदेश भी है। कार्यकम का सफल संचालन अंग्रेज़ी विभाग से डॉ मंजरी सुमन ने किया .

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