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धर्म और मानव गरिमा की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान* *_संघ ने मनाया गुरु तेग बहादुर जी का 350वां बलिदान दिवस_

 

*धर्म और मानव गरिमा की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान*
*_संघ ने मनाया गुरु तेग बहादुर जी का 350वां बलिदान दिवस_*

गाजियाबाद; रविवार, 21 दिसम्बर 2025; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गाजियाबाद महानगर द्वारा धर्म, स्वतंत्रता, मानव गरिमा एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना की रक्षा हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले हिन्द की चादर – श्री गुरुतेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुद्वारे से पधारे रागी जत्थे द्वारा शब्द कीर्तन के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को गुरु परम्परा, त्याग एवं साधना की भावभूमि से जोड़ा।

गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में श्री रविन्द्र सिंह जी (प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा बलिदान दिवस मनाने का उद्देश्य केवल इतिहास-स्मरण नहीं, बल्कि उस त्याग परम्परा को वर्तमान पीढ़ी के जीवन में जीवंत करना है।

उन्होंने कहा कि श्री गुरुतेग बहादुर जी का बलिदान सम्पूर्ण मानवता की धार्मिक स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा के लिए था, जो भारतीय राष्ट्रचेतना का मूल तत्व है।

उन्होंने ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान औरंगजेब की जबरन धर्मांतरण की नीतियों का विरोध करने के कारण हुआ। कश्मीरी पंडितों द्वारा अपने धर्म और अस्तित्व की रक्षा हेतु की गई पुकार पर गुरु साहिब ने निर्भीक होकर उनका साथ दिया, जिसके परिणामस्वरूप सन् 1675 में दिल्ली में उन्हें फाँसी दी गई।
यह बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता, वैचारिक स्वाधीनता एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा का विश्वविरल उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का संदेश था :-

धर्म परिवर्तन के दबाव के सामने झुकने के बजाय सत्य और आत्मसम्मान के लिए बलिदान स्वीकार करना, और यह त्याग किसी एक पंथ तक सीमित न होकर सम्पूर्ण मानवता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सरदार मलकीत सिंह जस्सर जी ने कहा कि श्री गुरुतेग बहादुर जी का जीवन और शहादत भारत की आत्मा—सहिष्णुता, साहस और समरसता—का साक्षात प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा ऐसे बलिदान दिवस समाज को त्याग, कर्तव्यबोध, राष्ट्रनिष्ठा और सामाजिक एकता का संदेश देने हेतु आयोजित किए जाते हैं।

कार्यक्रम में गुरुद्वारा समितियों के पदाधिकारियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही श्री हरमीत सिंह जी (अध्यक्ष, बजरिया गुरुद्वारा), श्री जगमोहन जी (प्रधान, गांधी नगर गुरुद्वारा), सरदार रविंद्र सिंह जी (प्रधान, कवि नगर गुरुद्वारा)

सभी ने गुरु साहिब के आदर्शों को सामाजिक जीवन में आत्मसात करने तथा राष्ट्र की एकता एवं सांस्कृतिक अखंडता के लिए सतत प्रयास का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि बलिदान दिवस मनाना राष्ट्र की स्मृति को जागृत रखना है, ताकि समाज यह समझ सके कि आज की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वाधीनता और सामाजिक सौहार्द असंख्य महापुरुषों के त्याग का परिणाम है।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक समरसता और सामाजिक एकता के भाव के साथ हुआ।

— प्रचार विभाग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
गाजियाबाद महानगर

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