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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में बुद्ध पूर्णिमा का आध्यात्मिक उत्साह के साथ आयोजन**

### **गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में बुद्ध पूर्णिमा का आध्यात्मिक उत्साह के साथ आयोजन**

 

ग्रेटर नोएडा, 1 मई: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में शुक्रवार को तुलसीदास बॉयज़ हॉस्टल सभागार में बुद्ध पूर्णिमा का पावन अवसर अत्यंत गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। तुलसीदास बॉयज़ हॉस्टल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए Gautama Buddha के जीवन और उनके उपदेशों पर सामूहिक चिंतन किया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विक्रम करुणा, वार्डन, तुलसीदास हॉस्टल के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने वर्तमान समय में बुद्ध के संदेशों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि करुणा, सजगता (माइंडफुलनेस) और नैतिक जीवन जैसे मूल्य न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए, बल्कि एक न्यायपूर्ण और संतुलित समाज के निर्माण के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।

 

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण बुद्ध वंदना रही, जिसे बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता अध्ययन स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति Theravada और Mahayana दोनों परंपराओं पर आधारित थी, जो बौद्ध परंपराओं की विविधता और समावेशिता को दर्शाती है। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा ध्यान एवं मंत्रोच्चारण सत्र आयोजित किया गया, जिसने पूरे वातावरण को शांत और ध्यानमय बना दिया।

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “शिक्षाएँ एवं अतिथि विचार” सत्र रहा, जिसमें विभिन्न विद्वानों और प्रशासकों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. सी. बी. भारस, प्रमुख, डॉ. अंबेडकर मानवाधिकार केंद्र एवं राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग, ने बौद्ध दर्शन और मानवाधिकार के अंतर्संबंध पर प्रकाश डालते हुए गरिमा, समानता और नैतिक शासन की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. चिंतला सिवासाई, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय मामलों एवं प्रमुख, बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता विभाग, ने बौद्ध विचारधारा की वैश्विक प्रासंगिकता और उसकी शैक्षणिक महत्ता पर अपने विचार रखे।

 

डॉ. प्रदीप तोमर, मुख्य वार्डन (बॉयज़), ने विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन और जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. मनमोहन सिंह, डीन, छात्र कल्याण, ने Gautama Buddha के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों को मानव जीवन की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। इसके पश्चात डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य ने बौद्ध शिक्षाओं की दार्शनिक गहराई और समकालीन जीवन में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की, विशेषकर तनाव, संघर्ष और नैतिक दुविधाओं जैसे आधुनिक चुनौतियों के संदर्भ में।

 

कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रदीप तोमर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसके उपरांत मिठाई वितरण किया गया, जिससे आपसी सद्भाव और सहयोग की भावना को और सुदृढ़ किया गया।

 

इस अवसर पर डॉ. सतीश चंद्र, डॉ. ओबैदुल गफ्फार, राहुल कुमार, कृष्ण गोपाल, अभिलाष सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

 

समग्र रूप से यह आयोजन बुद्ध के उपदेशों की शाश्वत प्रासंगिकता का सशक्त स्मरण रहा, जिसका समापन इस मंगलकामना के साथ हुआ— *“सभी प्राणी सुखी और शांत रहें।”*

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