Bharat Vandan News
Image default
प्रशासनिक

मिट्टी के दीयों से रोशन हो रही कारीगरों की जिंदगी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से फारूक को मिली नई पहचान*

*मिट्टी के दीयों से रोशन हो रही कारीगरों की जिंदगी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से फारूक को मिली नई पहचान*

 

*इलेक्ट्रिक चाक ने आसान किया पुश्तैनी काम, बढ़ा उत्पादन और आर्थिक विकास को मिली नई दिशा*

 

दीपावली खुशियों, उमंग और रोशनी का पर्व है। इस अवसर पर घर-आंगन को रोशन करने वाले मिट्टी के दीपक बनाने वाले पारंपरिक कारीगरों की मेहनत और हुनर का विशेष महत्व होता है। उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ऐसे ही पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके आर्थिक एवं कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जनपद गौतमबुद्ध नगर के फारूक की सफलता की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

 

*फारूक : पुश्तैनी कुम्हारी कला को मिला आधुनिक तकनीक का साथ*

 

जनपद गौतमबुद्धनगर के जेवर निवासी फारूक बताते हैं कि मिट्टी के बर्तन और दीपक बनाने का कार्य उनके परिवार में पीढ़ियों से चला आ रहा है। उनके दादा और पिता भी इसी व्यवसाय से जुड़े थे और अब वह स्वयं इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं।

फारूक के अनुसार, पहले हाथ से चलने वाले चाक की सहायता से मिट्टी के बर्तन, दीपक, कूल्हड़ आदि तैयार किए जाते थे, जिसमें अधिक मेहनत और समय लगता था। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत बिजली से चलने वाला चाक (इलेक्ट्रिक चाक) मिलने के बाद उनका काम काफी आसान हो गया है। अब कम समय में अधिक उत्पादन हो रहा है और उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। इससे बाजार में मांग बढ़ने के साथ उनके आर्थिक विकास के अवसर भी बढ़े हैं।

फारूक बताते हैं कि उनके यहां स्वयं मिट्टी के बर्तन, दीपक और त्योहारों में उपयोग होने वाले आवश्यक उत्पाद तैयार कर बेचे जाते हैं। इसके अतिरिक्त फुटकर विक्रेता भी उनसे उत्पाद खरीदकर बाजारों में बिक्री करते हैं।

 

*दीपावली पर मिट्टी के दीपों की बढ़ती मांग से कारीगरों के हुनर को मिल रहे नए अवसर*

 

दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीपकों की मांग बढ़ जाती है। भारतीय संस्कृति में मिट्टी के दीये शुभता, परंपरा और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में फारूक जैसे कारीगरों के लिए यह पर्व अपने उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर लेकर आता है। इलेक्ट्रिक चाक मिलने से अब वह त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के अनुरूप कम समय में अधिक दीपक और अन्य उत्पाद तैयार कर पा रहे हैं।

 

फारूक ने योजना का लाभ मिलने पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

*मिट्टी के दीयों के साथ रोशन हो रहे कारीगरों के सपने, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम*

 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय दस्तकारों तथा पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक एवं कौशल विकास के उद्देश्य से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित की जा रही है। योजना के माध्यम से पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों को प्रशिक्षण एवं टूल किट उपलब्ध कराकर उनके हुनर को प्रोत्साहित करने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

 

फारूक जैसे कारीगरों को मिले इलेक्ट्रिक चाक ने न केवल उनके पुश्तैनी काम को आसान बनाया है, बल्कि उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार कर उनके लिए आर्थिक उन्नति के नए अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।

 

इस दीपावली मिट्टी के दीयों के साथ इन कारीगरों के सपने भी रोशन हो रहे हैं। यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि जब पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है, तो आत्मनिर्भरता की राह आसान होती है और पीढ़ियों से चली आ रही कला को नई पहचान मिलती है।

Related posts

जिला प्रशासन द्वारा जनपद में कांवड़ यात्रा को लेकर इंतजाम चाक-चौबंद* *श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग पूरी तरह मुस्तैद

admin

पीसीएस मुख्य परीक्षा-2026 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए आयोजित हुआ मॉक साक्षात्कार*

admin

एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत जनपद में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न*

admin