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डिजिटल युग में कविता की नई यात्रा : नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में अर्पित मिश्रा की सशक्त उपस्थिति नई दिल्ली।

डिजिटल युग में कविता की नई यात्रा : नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में अर्पित मिश्रा की सशक्त उपस्थिति
नई दिल्ली।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के अवसर पर “डिजिटल युग में कविता: पाठक, प्लेटफ़ॉर्म और पहुँच” विषय पर आयोजित परिचर्चा में कानपुर की माटी से जुड़े, वर्तमान में नोएडा निवासी कवि एवं उद्यमी अर्पित मिश्रा ने अपनी नवीन काव्य रचना “भावांजलि” के साथ सार्थक सहभागिता की।
परिचर्चा के दौरान यह विचार प्रमुख रूप से सामने आया कि हिंदी काव्य साहित्य हर युग में प्रासंगिक रहा है, है और भविष्य में भी रहेगा। डिजिटल युग में भले ही माध्यम बदले हों, पर पुस्तकों का महत्व आज भी पाठकों के हृदय में उतना ही गहरा और स्थायी बना हुआ है।
अर्पित मिश्रा एक कवि और उद्यमी हैं, जिन्हें भारतीय इतिहास, संस्कृति और नेतृत्व के प्रति विशेष लगाव है। उनकी कविताएँ भारतीय पौराणिक कथाओं, महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और प्रकृति से प्रेरित हैं, जिनमें देशभक्ति और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है। वर्ष 2019 से वे छत्रपति शिवाजी महाराज, माता जीजाबाई, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसी महान विभूतियों को समर्पित काव्य रचनाएँ लिखते आ रहे हैं। उनके लेखन के माध्यम से सनातन संस्कृति और भारतीय इतिहास एक जीवंत रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत होता है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग और व्यवसाय की पृष्ठभूमि रखने वाले अर्पित मिश्रा कला और उद्यमिता—दोनों संसारों के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण करते हैं। उनका लेखन परंपरा और आधुनिकता के संगम की खोज करता है, जो उन्हें समकालीन रचनात्मक लेखन विमर्श में एक संवेदनशील और विचारशील योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
अर्पित मिश्रा की दोनों काव्य कृतियाँ “काव्यांजलि” और “भावांजलि” को पाठकों का अपार स्नेह प्राप्त हो रहा है। उल्लेखनीय है कि उनकी पुस्तकें अमेज़न पर न्यू लॉन्च कैटेगरी में बेस्ट सेलर भी रह चुकी हैं।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में उनकी उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि डिजिटल युग में भी कविता और पुस्तकें अपनी आत्मा, संवेदना और प्रभाव के साथ पाठकों को निरंतर जोड़ रही हैं।

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