Bharat Vandan News
Image default
Uncategorized

ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण MSME सेक्टर पर गंभीर संकट — सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे: अमित उपाध्याय गौतम बुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) इस समय अभूतपूर्व संकट

 

ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण MSME सेक्टर पर गंभीर संकट — सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे: अमित उपाध्याय
गौतम बुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) इस समय अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। पिछले लगभग 15 दिनों से चल रहे Iran–Israel conflict का सीधा प्रभाव देश की औद्योगिक गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
Industrial Business Association के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने प्रेस को जारी अपने बयान में बताया कि—“आज स्थिति यह है कि उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल, गैस और ऊर्जा संसाधन या तो उपलब्ध नहीं हैं या अत्यधिक महंगे दामों पर मिल रहे हैं, जिससे छोटे उद्योगों का संचालन लगभग असंभव हो गया है।”मुख्य समस्याएं जो उद्योगों को प्रभावित कर रही हैं:
1. गैस संकट : (LPG एवं PNG):कमर्शियल LPG सिलेंडर की भारी कमी ,बाजार में अत्यधिक ऊंचे दामों पर उपलब्धता, PNG गैस सप्लाई में अनियमितता
2. कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि:Polymer (LLDPE, PP, PVC, ABS आदि) में 45–50% तक वृद्धि , पेपर इंडस्ट्री में कीमतों में बेतहाशा उछाललोहे एवं एल्युमीनियम जैसे धातुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं
3. सप्लाई चेन एवं ऑपरेशन समस्याएं: ट्रांसपोर्टेशन लागत में वृद्धि , मशीनरी एवं तकनीकी बाधाएं , मैनपावर की उपलब्धता में कमी
4. MSME पर आर्थिक दबाव: कच्चा माल केवल अग्रिम भुगतान (Advance Payment) पर मिल रहा है, बड़े ग्राहक (Buyers) कीमत बढ़ोतरी स्वीकार नहीं कर रहे, फिक्स खर्च (बिजली बिल, वेतन, किराया, बैंक EMI) लगातार जारी,गंभीर स्थिति: छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर
अमित उपाध्याय ने कहा कि—
“छोटे-छोटे उद्योग तेजी से बंद हो रहे हैं। कई इकाइयां पहले ही उत्पादन रोक चुकी हैं। यह स्थिति केवल 15-20 दिनों की नहीं, बल्कि इसका प्रभाव आने वाले 1-2 वर्षों तक उद्योगों को झेलना पड़ेगा।”
महासचिव सुनील दत्त शर्मा ने कहा—“वर्तमान परिस्थितियों में MSME सेक्टर दोहरी मार झेल रहा है—एक ओर कच्चे माल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि, वहीं दूसरी ओर बाजार में मांग और मूल्य स्वीकृति का अभाव। छोटे उद्योगों के पास न तो इतना कार्यशील पूंजी (Working Capital) है और न ही वे लगातार घाटे में उत्पादन जारी रख सकते हैं। यदि शीघ्र ही सरकार द्वारा ठोस राहत उपाय नहीं किए गए, तो यह संकट बड़े स्तर पर औद्योगिक बंदी और रोजगार संकट का कारण बन सकता है।”
सरकार और प्रशासन से प्रमुख मांगें: कच्चे माल की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए, LPG एवं PNG गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, MSME के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए, औद्योगिक क्षेत्रों का ग्राउंड सर्वे कर वास्तविक स्थिति समझी जाए, बैंकों द्वारा EMI एवं लोन में अस्थायी राहत दी जाए
अमित उपाध्याय ने चेतावनी देते हुए कहा—“यदि समय रहते इस संकट का समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश सरकार के ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ और भारत के ‘Vision 2047’ पर पड़ेगा। MSME सेक्टर देश की रीढ़ है, और इसे नजरअंदाज करना आर्थिक रूप से घातक सिद्ध हो सकता है।”
“सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर जमीनी हकीकत देखें और तत्काल ठोस कदम उठाएं, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को बचाया जा सके।”
धन्यवाद
अमित उपाध्याय
अध्यक्ष
इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA)

Related posts

I ditched after-school activities so my sons could play how they please

admin

आज भारत मंडपम, प्रगति मैदान, में इंडिया मेडटेक एक्स्पो २०२५ का शुभारंभ श्री पीयूष गोयल, माननीय कॉमर्स व इंडस्ट्री मिनिस्टर, भारत सरकार द्वारा दिया गया

admin

YEIDA and JETRO Discuss Strategic Expansion; Proposal for Exclusive Japanese MSME Park suggested

admin