*महाराणा प्रताप*
*रवीन्द्र कुमार राणा*
आओ तुमको बतलाता हूँ,
अमर कहानी महाराणा की।
चेतक जिसका प्यारा घोड़ा,
क्षत्रिय राजपूत मस्ताना की।
घास की रोटी खाकर भी जो,
अपने कर्तव्य पथ से न डिगा।
उसकी निर्भीक शौर्य पराक्रम,
वीरता के आगे कोई न टिका।
रानी पदमिनी के जौहर की,
जय पन्ना जैसी धाय मां की।
भामा शाह से महादानी की,
झाला मन्ना से बलिदानी की।
राष्ट्र निर्माण में मेवाड़ मुकुट ने,
अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।
राष्ट्र धर्म कर्तव्य बोध में जिसने,
साम्राज्य सब ऐश्वर्य त्याग लिया।
जिनसे है इतिहास कलंकित,
जयचंद जैसे द्रोही गद्दारों की।
मुगलों को है नित धूल चटाई,
अमर कहानी महाराणा की।

