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ग्रेटर नोएडा – 44 गांवों के किसानों के 10% आबादी भूखंड का मुद्दा फिर गरमाया, राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से हस्तक्षेप की मांग

ग्रेटर नोएडा – 44 गांवों के किसानों के 10% आबादी भूखंड का मुद्दा फिर गरमाया, राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से हस्तक्षेप की मांग

ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के 44 गांवों के प्रभावित किसानों ने वर्षों से लंबित 10 प्रतिशत आबादी भूखंड के मामले को लेकर राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों की ओर से भेजे गए प्रार्थना-पत्र में 10 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड दिए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।
किसानों का कहना है कि वर्ष 2010 में मुआवजा वृद्धि एवं आबादी भूखंड की मांग को लेकर प्राधिकरण और किसानों के बीच गंभीर टकराव हुआ था, जिसमें पांच किसानों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति में प्राधिकरण और किसानों के बीच 64.7 प्रतिशत मुआवजा वृद्धि तथा 6 प्रतिशत आबादी भूखंड के स्थान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड दिए जाने पर सहमति बनी थी।
किसानों के अनुसार, इसी मामले से संबंधित गजराज आदि बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, रिट संख्या 37443/2011 इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा। पत्र में दावा किया गया है कि न्यायालय के समक्ष प्राधिकरण और किसानों के बीच बनी सहमति के आधार पर आदेश पारित हुआ था तथा न्यायालय नहीं गए किसानों के संबंध में प्राधिकरण को उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे।
किसानों ने आरोप लगाया कि इसके बाद तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा किसानों से शपथ-पत्र (एफिडेविट) लिए गए और उन्हें न्यायालय नहीं जाने के लिए कहा गया। किसानों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सभी पात्र किसानों को 64.7 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा एवं 10 प्रतिशत आबादी भूखंड प्रदान किए जाएंगे।
पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2016 में तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में 10 प्रतिशत आबादी भूखंड संबंधी प्रस्ताव को कथित रूप से निरस्त कर दिया गया, जबकि 64.7 प्रतिशत मुआवजे का लाभ किसानों को दिया गया। इसके बाद प्राधिकरण द्वारा केवल उन किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने की बात कही गई, जिन्होंने न्यायालय की शरण ली थी।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे किसानों को भी 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए गए, जो न्यायालय नहीं गए थे। किसानों के अनुसार प्राधिकरण की विभिन्न बोर्ड बैठकों में आबादी भूखंड से संबंधित प्रस्ताव अनुमोदन के लिए शासन को भेजे गए, लेकिन शासन स्तर पर प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होने के बावजूद कुछ किसानों को भूखंड दिए गए।
पारदर्शी प्रक्रिया से 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड देने की मांग
किसानों का कहना है कि आबादी भूखंडों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आबादी भूखंडों का निस्तारण विधिसम्मत एवं पारदर्शी प्रक्रिया के बजाय कथित तौर पर मनमाने तरीके से किया गया, जिसके संबंध में किसानों के पास दस्तावेज एवं प्रतिलिपियां उपलब्ध हैं।
किसानों ने इन तथ्यों के आधार पर प्राधिकरण के स्तर पर व्यापक अनियमितताओं की शिकायत भी उठाई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा लंबित 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड का न्यायपूर्ण तरीके से निस्तारण कराने की मांग की है।
जयंत चौधरी से हस्तक्षेप की अपील
प्रभावित किसानों ने राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से मांग की है कि वे किसानों के हित एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए 10 प्रतिशत आबादी भूखंड संबंधी प्रस्ताव को शासन स्तर से स्वीकृत कराने में हस्तक्षेप करें, ताकि वर्षों से लंबित समस्या का न्यायोचित समाधान हो सके।
किसानों का कहना है कि इस मामले में सकारात्मक निर्णय होने से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के 44 गांवों के प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान संभव हो सकेगा।

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