गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 27 अप्रैल 2026 को आईसीएसएसआर प्रायोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “द नेक्सस इम्पेरेटिव: एनवायरनमेंट, पब्लिक हेल्थ एंड पॉलिसी फॉर अ सस्टेनेबल फ्यूचर” (EHP Nexus 2026) का सफल उद्घाटन किया गया। यह सम्मेलन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और नीतिगत ढाँचों के महत्वपूर्ण अंतर्संबंधों पर विचार-विमर्श किया जा सके। सम्मेलन की केंद्रीय थीम “स्वस्थ समुदायों और पारिस्थितिक तंत्र के लिए विज्ञान को नीति में रूपांतरित करना” है।
उद्घाटन सत्र में अनेक विशिष्ट गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने मुख्य संरक्षक के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता की। श्री सुधीर त्रिपाठी, पूर्व मुख्य सचिव, झारखंड एवं पूर्व अध्यक्ष, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) गगनदीप बख्शी, सेना मेडल (SM), विशिष्ट सेवा मेडल (VSM), ने अपने प्रभावशाली मुख्य वक्तव्य में राष्ट्रीय विकास में पर्यावरणीय सुरक्षा के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय क्षरण, जलवायु-प्रेरित व्यवधान और जनस्वास्थ्य संकट उभरते हुए गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे हैं, जिन पर त्वरित ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत नीतिगत समन्वय, राष्ट्रीय तैयारी और संस्थागत सुदृढ़ता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता को केवल विकास की प्राथमिकता नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों, राष्ट्रीय संसाधनों और सामाजिक स्थिरता की सुरक्षा हेतु रणनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।
अपने संबोधन में माननीय कुलपति महोदय प्रो. राणा प्रताप सिंह ने शोध और नीति के बीच सेतु निर्माण में विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जटिल पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान हेतु अंतःविषयक अनुसंधान, नवाचार-आधारित समाधानों और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को परिवर्तनकारी विचारों के केंद्र के रूप में कार्य करते हुए वैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
श्री सुधीर त्रिपाठी ने जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय नीतियों के क्रियान्वयन में प्रभावी प्रशासन और सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता क्रियान्वयन, निगरानी और सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समावेशन से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सम्मेलन को प्रो. प्रतीक शर्मा, माननीय कुलपति, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, की उपस्थिति और विचारों से भी समृद्धि मिली। उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में तकनीकी नवाचार और डेटा-आधारित दृष्टिकोण की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ पर्यावरणीय शासन, जनस्वास्थ्य तंत्र और सूचित नीति-निर्माण को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
श्री प्रवीण रामदास, राष्ट्रीय संयुक्त संगठन सचिव, विज्ञान भारती (VIBHA), ने सतत समाधान के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. चंदर के. सिंह, रजिस्ट्रार (प्रभारी) एवं अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ने EHP Nexus जैसे सहयोगात्मक मंचों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन अकादमिक जगत, सरकार और नागरिक समाज के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देगा तथा पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु क्रियान्वित किए जा सकने वाले सुझाव प्रस्तुत करेगा।
उद्घाटन सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथियों द्वारा EHP Nexus 2026 सम्मेलन स्मारिका (Conference Souvenir) का भी विमोचन किया गया। इस स्मारिका में सम्मेलन की दृष्टि और उद्देश्यों, विशिष्ट व्यक्तित्वों के संदेशों तथा शोध-पत्र सारांशों को शामिल किया गया है, जो पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और नीति विषयों पर विविध शैक्षणिक सहभागिता को प्रतिबिंबित करता है।
यह सम्मेलन पर्यावरण विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एप्लाइड साइंसेज, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
दो दिवसीय सम्मेलन (27–28 अप्रैल, 2026) में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएँ और शोध प्रस्तुतियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जनस्वास्थ्य चुनौतियाँ तथा सतत नीतिगत हस्तक्षेप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है। देशभर से आए प्रतिभागी विज्ञान और नीति के बीच सेतु निर्माण हेतु सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं।

